Mera Shikshak Essay In Hindi

आदर्श अध्यापक

अध्यापक और समाज में एक घनिष्ठ सम्बन्ध होता है | किसी भी समाज व् राष्ट्र की उन्नति उस देश के आदर्श, सुयोग्य तथा चरित्रवान अध्यापको पर निर्भर करती है | अध्यापक को राष्ट्र का निर्माता समझा जाता है | एक अध्यापक की तुलना हम सृष्टिकर्त्ता ब्रह्मा से भी कर सकते है | जैसे ब्रह्मा का कार्य संसार के प्रत्येक प्राणी और पदार्थ को बनाना है, उसी प्रकार उन सब बने हुए मनुष्यों को संसार के व्यवहार योग्य बनाना, सजा – संवार कर प्रस्तुत करना एक आदर्श अध्यापक का कार्य है | इन कार्यो को भली प्रकार पूरा करने के लिए अध्यापक को सुयोग्य चरित्रवान तथा कर्त्तव्य – परायण होना चाहिए |

हमारे देश भारत में प्राचीन काल में प्राय: आदर्श अध्यापक ही होते थे तथा उन्हें ही अध्यापन का कार्य सौपा जाता था | ऐसे अध्यापको का जीवन स्वार्थ तथा लोभ से दूर रहता था | उनका जीवन तपोमय तथा ह्रदय विशाल होता था | परन्तु आज हमे इसके विपरीत की स्थिति दिखाई पडती है | आज के आध्यापक में ऐसा कर पाने का गुण व् शक्ति नही रह गई है | उनकी मनोवृत्ति आम व्यवसायियों और दुकानदारों जैसी हो गई है जिनका मुख्य लक्ष्य धन – कमाना होता है | यह बहुत खेद की बात है | हमे अपनी विचारधारा में परिवर्तन कर आदर्श जीवन अपनाना चाहिए | क्योकि आदर्श अध्यापक ही राष्ट्र का सच्चा गुरु होता है | तथा मानव – जीवन को ऊचा उठाता है |

आदर्श अध्यापक में अनेक गुण विद्दमान होते है | वह प्रत्येक विद्दार्थी के साथ प्रेम का व्यवहार करता है | वह दिन, दुखी तथा असहाय विद्दार्थियो की आवश्यकतानुसार सहायता करना अपना कर्त्तव्य समझता है |  वह सच्चे अर्थो में विद्वान होता है जिसे अपनी विद्वता पर अहंकार नही होता है | उसका अपने विद्दार्थियो के सम्मुख  एक- एक पग आदर्श का होता है | वह सदैव अपने विद्दार्थियो के चरित्र – निर्माण में अपना जीवन लगा देता है | उसका ह्रदय परोपकारी होता है |

आदर्श अध्यापक कभी भी अपने कर्त्तव्य के मार्ग से विचलित नही होता है | वह समाज व राष्ट्र को ऐसी सम्पत्ति प्रदान करता है जिसे पाकर उस समाज व् राष्ट्र के प्राणी युगों तक शान्ति व् आनन्द प्राप्त करते रहते है | परन्तु खेद है कि आज के युग में ऐसे आदर्श अध्यापक बड़ी कठिनाई से मिलते है | परन्तु जिन राष्ट्रो तथा समाजो को ऐसे अध्यापक मिल जाते है वे सौभाग्यशाली होते है |

January 28, 2017evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo CommentHindi Essay, Hindi essays

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मेरे प्रिय शिक्षक पर निबंध Essay On My Favorite Teacher In Hindi Language

शिक्षा मानव विकास में बहुत ही बड़ी भूमिका का निर्वाह करती है और इस कार्य में शिक्षक की भूमिका सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण होती है | इसलिए शिक्षक को देवतुल्य एंव माता-पिता से भी श्रेष्ठ माना गया है | प्राचीन काल में समान्यत: मंदिर एंव मठ शिक्षा के केंद्र थे एवं शिक्षा प्रदान करने वाले व्यक्ति, चाहे वह पुजारी हो या मठ में रहने वाला सन्यासी, को समाज में ईश्वर तुल्य सम्मान प्राप्त था | आधुनिक काल में शिक्षण के बड़े संस्थानों की स्थापना के बाद से तथा शिक्षा के निजीकरण एंव शिक्षकों के कुछ पेशेवर रवैयों के कारण उनके सम्मान में भले ही थोड़ी कमी हुई हो, किन्तु शिक्षकों के समाजिक महत्त्व एवं स्थान में आज भी कोई कमी नहीं हुई है | गुरु के महत्त्व के संदर्भ में कबीर की उक्ति सटीक बैठती है-

“गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पाय |
बलिहारी गुरु आपनो, गोविंद दियो बताय ||”

मैं भी अपने शिक्षकों का सम्मान करता रहा हूं | आज मैं जो कुछ भी हूं, वह मेरे कई शिक्षकों के योगदान का ही परिणाम है | मुझे सुशिक्षित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाले शिक्षकों की सूची काफी लंबी है | समय-समय पर मुझे कई शिक्षकों का सहयोग, मार्गदर्शन एंव परामर्श मिला | मैं उन सभी शिक्षकों का आभारी हूं, और जीवन भर आभारी रहूंगा | वे सभी मेरे प्रिय हैं, किन्तु उन सभी में एक ऐसे शिक्षक भी हैं, जो मेरे सर्वाधिक प्रिय शिक्षक रहे हैं जिनका नाम है- व्यास मुनि राय |

किसी भी विद्यालय की सफलता उसके शिक्षकों के व्यवहार पर निर्भर करती है | इसलिए शिक्षकों को अपनी भूमिका एवं कार्यों के प्रति अपने उत्तरदायित्व को भली-भांति समझना पड़ता है | यद्यपि शिक्षक का मुख्य कार्य अध्यापन करना होता है, किन्तु अध्यापन के उद्देश्यों की पूर्ति तब ही हो सकती है जब वह इसके अतिरिक्त, विद्यालय की अनुशासन व्यवस्था में सहयोग करें, शिष्टाचार का पालन करें, अपने सहकर्मियों के साथ सकारात्मक व्यवहार करें एवं पाठ्यक्रम सहगामी क्रियाकलापों में अपने साथी शिक्षकों एवं शिक्षार्थियों का सहयोग करें | इन सभी दृष्टिकोण से श्री व्यास मुनि राय को ‘आदर्श शिक्षक’ कहा जा सकता है | इसलिए वे न केवल छात्रों के बीच बल्कि शिक्षकों के बीच भी लोकप्रिय हैं एंव छात्रों के अभिभावक भी उनका सम्मान करते हैं |

एक आदर्श शिक्षक के रूप में वे धार्मिक कट्टरता, प्राइवेट ट्यूशन, नशाखोरी, इत्यादि से बचते हैं | वे सही समय पर विद्यालय आते हैं, शिक्षण को प्रभावी बनाने के लिए शिक्षण-सहायक सामग्रियों का भरपूर प्रयोग करते हैं, छात्रों को हमेशा प्रोत्साहित करते हैं तथा अपने साथियों से भी मित्रतापूर्ण संबंध रखते हैं | उनकी विशेषता यह है कि वे हमेशा आशावादी दृष्टिकोण रखते हैं | वे छात्रों को अच्छे कार्य के लिए हमेशा प्रेरित करते रहते हैं | उन्हें पता है कि छात्रों का पर नियंत्रण कैसे रखा जाए | उन्हें मनोविज्ञान का अच्छा ज्ञान है, इस ज्ञान का प्रयोग वे शिक्षण-कार्य एंव छात्रों को निर्देशन तथा परामर्श देने में करते हैं | उन्हें समाज की आवश्यकताओं का भली-भांति ज्ञान है, इसलिए वे छात्रों को उनके नैतिक कर्तव्यों का ज्ञान कराते हैं | वे विनोदी स्वभाव के हैं | उनका व्यक्तित्व अत्यंत प्रभावशाली है | इन्हीं कारणों से वे मेरे सबसे प्रिय शिक्षक हैं |

श्री व्यास मुनि राय ने दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली से हिन्दी में स्नातकोत्तर की शिक्षा ग्रहण की है | उन्होंने हिन्दी के अतिरिक्त अंग्रेजी एवं भारतीय भाषाओं के विपुल साहित्य का भी अध्ययन किया है | शिक्षण के अलावा पढ़ना भी उनका शौक है | हिन्दी साहित्य उनका प्रिय विषय है | जब वे मधुर स्वर में कविता पाठ करते हैं, तो छात्र मन्त्रमुग्ध होकर उन्हें सुनते हैं | उनकी व्याख्या इतनी सरल होती है कि सामान्य छात्रों को भी जटिल काव्य का अर्थ समझने में कोई कठिनाई नहीं होती |

वे शिक्षण के साथ-साथ पाठ्यक्रम सहगामी क्रियाओं में भी अत्यंत रुचि रखते हैं | वे समय-समय पर नगर-स्तरीय निबंध-प्रतियोगिता, कहानी प्रतियोगिता एंव काव्य-रचना प्रतियोगिता आयोजित कराते रहते हैं | इन आयोजनों का उद्देश्य क्षात्रों में रचनाशीलता का विकास करना होता है | इन कार्यक्रमों के अतिरिक्त वे भाषण प्रतियोगिता, गोष्ठी, नाटक एवं एकांकी का भी आयोजन करवाते हैं | कॉलेज प्रशासन ने इस हेतु ही उन्हें प्रभार भी दिया हुआ है |

श्री ब्यास मुनि राय का संप्रेषण एंव अध्यापन कौशल अद्वितीय है | वे जीवन में संप्रेषण कौशल के महत्त्व को समझते हैं | इसलिए वे छात्रों में संप्रेषण कौशल के विकास पर जोर देते हैं | छात्रों में संप्रेषण कौशल के विकास के लिए वे छदम साक्षात्कार, सामूहिक परिचर्चा एवं वाद-विवाद प्रतियोगिता आयोजित करवाते हैं |

व्यक्ति को शिष्ट आचरण की शिक्षा अपने घर, परिवार, समाज एवं स्कूल से मिलती है | बच्चे का जीवन उसके परिवार से प्रारंभ होता है | यदि परिवार के सदस्य गलत आचरण करते हैं तो बच्चा भी उसी का अनुसरण करेगा | परिवार के बाद बच्चा अपने समाज एंव स्कूल से सीखता है | यदि उसके साथियों का आचरण खराब होगा तो उससे उसके भी प्रभावित होने की पूरी संभावना बनी रहेगी | यदि शिक्षक का आचरण गलत है तो बच्चे भी निश्चित ही प्रभावित होंगे | इसलिए बच्चों को शिष्ट आचरण सिखाने की अपनी भूमिका को पूरा करते हुए वे छात्रों को शिष्ट आचरण की शिक्षा देते हैं |

श्री व्यास मुनि राय का कहना है कि बच्चों को अनुशासित रखने के लिए आवश्यक है कि शिक्षक एंव अभिभावक अपने आचरण में सुधार लाकर स्वयं अनुशासित रहते हुए बाल्यकाल से ही बच्चों में अनुशासित रहने की आदत डालें | वही व्यक्ति अपने जीवन में अनुशासित रह सकता है, जिसे बाल्यकाल में ही अनुशासन की शिक्षा दी गई हो | बाल्यकाल में जिन बच्चों पर उनके माता-पिता लाड-प्यार के कारण नियन्त्रण नहीं रख पाते वे बच्चे अपने भावी जीवन में भी सफल नहीं हो पाते | अनुशासन के अभाव में कई प्रकार की बुराइयां समाज में अपनी जड़ों को विकसित कर लेती हैं | परिणामस्वरूप छात्रों का विरोध-प्रदर्शन, परीक्षा में नकल, शिक्षकों से बदसलूकी अनुशासनहीनता के उदाहरण हैं | इसका खामियाजा इन्हें बाद में जीवन की असफलताओं के रूप में भुगतना पड़ता है, किन्तु जब तक वे समझते हैं तब तक बहुत देर हो चुकी होती है | इसलिए वे छात्रों को अनुशासित रखने पर जोर देते हैं |

किसी मनुष्य की व्यक्तिगत सफलता में भी उसके शिष्टाचार एवं अनुशासित जीवन की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती है | जो छात्र अपने प्रत्येक कार्य नियम एवं अनुशासन का पालन करते हुए संपन्न करते हैं, वे अपने अन्य साथियों से न केवल श्रेष्ठ माने जाते हैं, बल्कि सभी के प्रिय भी बन जाते हैं | भारत के अनेकानेक महापुरुषों ही की भांति श्री व्यास मुनि राय भी एक महापुरुष की तरह अपने कर्मों से सबको शिष्ट एंव अनुशासित रहने की प्रेरणा देते हैं | इसलिए वे केवल मेरे ही नहीं बल्कि अनेक अन्य छात्रों एवं उनके अभिभावकों के सम्मान के पात्र हैं | उनके कई छात्रों ने अब तक उनकी शिक्षा, मार्गदर्शन एवं प्रेरणा से जीवन पथ पर ढेरों सफलताएं अर्जित की है | आशा है कि आने वाले समय में भी वे इसी तरह अपने छात्रों का मार्गदर्शन कर उनकी सफलता में भागीदार बनते रहेंगे |

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